DS का full form और जानें Programming पूरी जानकारी

 डाटा स्ट्रक्चर किसी भी कंप्यूटर में डाटा को रखने ( Store ) और व्यवस्थित ( Organize ) करने का एकमात्र तरीका है ताकि जब भी हमें जरुरत पड़े हम उसे यूज़ कर पाएं। 

DS Full form in Programming: Data Structure ( डाटा स्ट्रक्चर )

आप हमरे इस पोस्ट में डाटा स्ट्रक्चर के फुल फॉर्म के अलावा और भी बहुत कुछ जानने वाले हैं जो आपको आगे काम आएगी जैसे कि डाटा स्ट्रक्चर ( Data  Structure ) क्या है, इसके कितने प्रकार ( Types ) होते हैं , उसके Major Operation क्या-क्या हैं? और भी बहुत कुछ तो इस पोस्ट में हमारे साथ बने रहिये और डाटा स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी प्राप्त करिये। 

सबसे पहले हमलोग जानेंगे की डाटा स्ट्रक्चर क्या है?

What is Data Structure? ( डाटा स्ट्रक्चर क्या है?)  

 
जैसा की इसके नाम से ही पता चल रहा है कि डाटा का एक स्ट्रक्चर जिसमे प्राप्त डाटा को रखा जाता है। 
“डाटा स्ट्रक्चर किसी भी कंप्यूटर मेमोरी में डाटा को स्टोर और ऑर्गनाइज करने का तरीका है जिससे हम डाटा को जब भी जरुरत पड़े यूज़ कर पाएं। कहने का अर्थ यह है की डाटा स्ट्रक्चर के द्वारा डाटा को इस प्रकार रखा जाता है जिसे किसी भी समय जरुरत पड़ने पर आसानी से एक्सेस ( Access ) किया जा सके “
मेमोरी में डाटा को व्यवस्थित करने के कई तरीके हैं जैसे कि C Language में Array. Array मेमोरी तत्वों ( मेमोरी एलिमेंट्स ) का एक संग्रह है जिसमे डाटा को क्रमिक ( एक के बाद एक ) रूप से व्यवस्थित किया जाता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि “Array एलिमेंट्स को निरंतर तरीके से संग्रहीत ( व्यवस्थित ) करता है।” 
डाटा को संगठन ( व्यवस्थित करने का यह तरीका ) डाटा स्ट्रक्चर में Array की मदद से किया जाता है। मेमोरी में डाटा को संगठित करने के और भी कई तरीके है आइये उनके बारे में भी जानते हैं। 
डाटा स्ट्रक्चर ( Data Structure ) प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे कि C, C++, Java Python की तरह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज नहीं है बल्कि यह अल्गोरिथम का एक सेट है जिसे हम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में डाटा को मेमोरी में स्ट्रकचर देने के लिए यूज़ करते है। 
डाटा स्ट्रक्चर कंप्यूटर साइंस अल्गोरिथम का एक मुख्य भाग है जिसका यूज़ करके Programmers डाटा को अच्छे ढंग से हैंडल कर सकते हैं। यह प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर की परफॉरमेंस को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। 

डाटा स्ट्रक्चर के प्रकार ( Types of Data Structure )

डाटा स्ट्रक्चर दो प्रकार के होते हैं:
1. प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर ( Primitive Data Structure )
2. नॉन-प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर ( Non-primitive data Structure )

1. प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर ( Primitive Data Structure ):

प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर ऐसा डाटा स्ट्रक्चर होता है डायरेक्ट ही मशीन Instructions ( निर्देश ) से ऑपरेट किया जा  सकता है। यह सिस्टम तथा कम्पाइलर ( Compiler ) से डिफाइन होता है। 
प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर प्रिमिटिव डाटा टाइप्स होते हैं जैसे कि int, char, float, double, pointer ये सभी प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर के अंतर्गत आते हैं जो सिंगल Value  को रख सकता है। 

2. नॉन-प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर ( Non-primitive data Structure )

नॉन-प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है  मशीन इंस्ट्रक्शंस से ऑपरेट नहीं किया जा सकता है इस प्रकार के डाटा स्टोक्टूरे प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर से derived होते हैं। 
नॉन-प्रिमिटिव डाटा स्ट्रक्चर को दो भागों में बांटा गया है:
  1.  लीनियर डाटा स्ट्रक्चर ( Linear data structure )
  2.  नॉन-लीनियर  स्ट्रक्चर ( Non-linear data structure )

1.  लीनियर डाटा स्ट्रक्चर ( Linear data structure )

Linear डाटा स्ट्रक्चर एक ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है जिसमे डाटा आइटम को एक लीनियर  ( रेखीय ) रूप में रखा जाता है ( व्यवस्थित किया जाता है ) .जिसमे एक डाटा आइटम दूसरे डाटा आइटम से रेखीय रूप में जुड़ा हुआ रहता है।  
इसके अंतर्गत Array, Linked list, Stacks, और Queues आदि को यूज़ किया जाता है।    

 2.  नॉन-लीनियर  स्ट्रक्चर ( Non-linear data structure )

Non-linear डाटा स्ट्रक्चर एक ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है जिसमे डाटा आइटम्स को क्रमबद्ध तरीके से नहीं व्यवस्थित किया जाता है। जिसमे एक डाटा आइटम किसी भी दूसरे डाटा आइटम से जुड़ा हुआ हो सकता है। 
इसके अंतर्गत tree और graph को यूज़ किया जाता है। 
Data Structure इस तरह से भी डिफाइन किया है;
  1. स्टैटिक डाटा स्ट्रक्चर:  
यह एक ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है जहाँ आकार ( size ) compile time पर आवंटित ( allocated ) होती है। इसलिए अधिकतम साइज फिक्स्ड ( Fixed ) होता है। 
  2. डायनामिक डाटा स्ट्रक्चर:
यह एक ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है जहाँ आकार Run time पर आवंटित होती है। इसलिए अधिकतम साइज फ्लेक्सिबल ( Flexible ) होता है। 

डाटा स्ट्रक्चर के ऑपरेशन्स ( Operations of data Structure )

डाटा स्ट्रक्चर में किए जाने वाले प्रमुख ऑपरेशन निम्न हैं:
1. सर्चिंग ( Searching ): किसी एलिमेंट को सर्च करने की प्रक्रिया सर्चिंग कहलाती है। सर्चिंग दो अल्गोरिथम से होती है पहला है बाइनरी सर्च ( Binary search ) और दूसरा है लीनियर सर्च ( Linear search ).
2. सॉर्टिंग ( Sorting ): डाटा  किसी विशेष क्रम में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को सॉर्टिंग कहते हैं। बहुत सारी अल्गोरिथम का यूज़ करके सॉर्टिंग को परफॉर्म किया जा सकता है जैसे कि  insertion sort, selection sort, bubble sort, radix sort आदि।  
3. इंसर्शन ( Insertion ): किसी लोकेशन में एलिमेंट ऐड करने की प्रक्रिया को इंसर्शन कहा जाता है। यदि किसी डाटा स्ट्रक्चर का साइज n है तो हम उसमे n-1 एलिमेंट ही इन्सर्ट कर सकते हैं। 
4. डेलेशन ( Deletion ):  किसी एलिमेंट को डिलीट करने की प्रक्रिया को deletion कहा जाता है।  
5. अपडेशन ( Updation ): किसी एलिमेंट की जगह पर दूसरे एलिमेंट को बदलने की प्रक्रिया updation  कहलाती है। 

डाटा स्ट्रक्चर के लाभ ( Advantages of Data structure )

* इसके माध्यम से हम हार्ड डिस्क पर जानकारी स्टोर कर सकते हैं। और हम इस जानकारी का बाद में उपयोग कर सकते हैं।
* हम बहुत बड़े डेटाबेस को आसानी से प्रबंधित (manage ) कर सकते हैं।
* यह एल्गोरिथ्म डिजाइनिंग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
* इसके माध्यम से हम सॉफ्टवेयर सिस्टम पर डेटा का उपयोग कर सकते हैं और इसे प्रोसेस भी कर सकते हैं।
* इससे डेटा की प्रोसेसिंग बहुत आसान हो जाती है।
* यदि प्रोग्रामर सही डाटा स्ट्रक्चर का उपयोग करता है, तो यह बहुत समय बचाता है और भंडारण ( storage ) और प्रसंस्करण ( Processing)  समय भी बचाता है।
albarch hawkton

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