Computer full form: कम्प्यूटर के बारे में जानकारी

आज दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में कंप्यूटर ने अपना स्थान बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है। संचार क्रांति में प्रतिदिन प्रगति करने में कंप्यूटर तकनीक की विशेष भूमिका है। 

कंप्यूटर की निरंतर बढ़ती क्षमताओं के फलस्वरूप, इसका प्रयोग प्रतिदिन नवीन कार्यक्षेत्रों में बढ़ता जा रहा है। 

उदाहरण के लिए; हमारे बिजली तथा टेलीफोन के बिल कंप्यूटर द्वारा प्रिंट करके भेजे जाते है, रेलगाड़ियों और हवाई जहाज़ों में सीटों का आरक्षण कंप्यूटर द्वारा किया जाता है, बैंको में अधिकतर कार्य कंप्यूटर की सहायता से होने हैं, इत्यादि।

इतना ही नहीं, कंप्यूटर की सहायता से हम एक नगर दूसरे नगर अथवा देश से दूसरे देश में अपने संदेश ईमेल की सहायता से कुछ ही क्षणों में प्रेषित करने में सक्षम है। 

विश्व के किसी भी कोने से हम अपनी इच्छित वस्तुएं इंटरनेट के माध्यम से खरीदने या बेचने में सक्षम हो गए हैं। 

कहने का तात्पर्य यह है कि अब कंप्यूटर गिनी चुनी जगहों पर काम में आने वाली दुर्लभ मशीन नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू वस्तु बनती जा रही है इसलिए वर्तमान युग को कंप्यूटर का युग कहा जाने लगा है।

Computer full form

आज फिल्म निर्माण, उद्योग, व्यापार, शोध, यातायात नियंत्रित और अंतरिक्ष जगत का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिसके द्वारा मानव द्वारा मस्तिष्क कि बाते भी कंप्यूटर समझकर उसे निष्पादित (Execute) करने में सक्षम हो रहा है। 

आज कल इतने छोटे आकार के कम्प्यूटर का निर्माण हो रहा है, जिन्हे आप आसानी से जेब में लेकर कहीं भी लेजा सकते है और अपने आवश्यकता के अनुसार उनका उपयोग भी कर सकते है।

Computer शब्द लैटिन भाषा के Computar से बना है, जिसका अर्थ – ‘ गणना करना ‘ । 

दूसरे शब्दों में: “कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है, जो गणना करती है या गणनाओं को करने में हमारी मदद करती है।”

इनपुट / आउटपुट यूनिट, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट तथा मेमोरी यूनिट के कंपोनेंट कहलाती है। इनपुट यूनिट वे हार्डवेयर होते है, जो कंप्यूटर को डेटा भेजते है। 

डाटा तथा निर्देशों को परिणाम के रूप में प्रदर्शित करने के लिए जिन यूनिट्स का प्रयोग किया जाता है, उन्हें आउटपुट यूनिट कहते हैं।

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट और कम्प्यूटर का वह भाग होता है जिसमें अर्थमेटिक और लॉजिकल ऑपरेशन्स निष्पादित होते है। मेमोरी कम्प्यूटर का वह भाग है, जिसमें डेटा तथा निर्देशों को संगृहीत(Store) किया जाता है।

कम्प्यूटर क्या है? ( What is Computer?):

वास्तव में कम्प्यूटर क्या है? कम्प्यूटर एक स्वचालित तथा निर्देशों के अनुसार कार्य करने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसमें डेटा को प्राप्त, संगृहीत अथवा प्रदर्शित करने की क्षमता होती है। 

इस डिवाइस द्वारा प्राप्त डेटा का प्रयोग करते किसी प्रोग्राम के निर्देशो के अनुसार गणितीय, तार्किक अथवा मैनिपुलेटिव क्रियाओं को करते हुवे सूचना को विभिन्न इच्छित रूपो में प्रदर्शित किया जा सकता है। 

कोई कम्प्यूटर, बड़ा हो या छोटा, नया हो या पुराना, उसकी मूल सरंचना सदैव एक ही तरह की होती है। ‘Computer’ शब्द अंग्रेजी के आठ अक्षरों से मिलकर बना है, जो इसके अर्थ को और भी अधिक व्यापक बना से देते हैं।

कम्प्यूटर का फूल फॉर्म (Computer Full form)

Computer: Commonly Operated Machine Particularly Used For Technical Education and Research

प्रत्येक कम्प्यूटर के मुख्य पांच भाग है होते है, जो निम्नलिखित है:

1. इनपुट यूनिट (Input unit)

2. आउटपुट यूनिट (Output unit)

3. मेमोरी यूनिट (Memory unit)

4. अर्थमैटिक एवं लॉजिकल यूनिट (Arithmetic and Logic Unit –  ALU) तथा

5. कंट्रोल यूनिट (Control unit)

कम्प्यूटर में डेटा को स्वीकार करके प्रोग्राम को क्रियान्वित करने की क्षमता होती है। इनपुट यूनिट द्वारा हम अपना डेटा, निर्देश या प्रोग्राम कम्प्यूटर में प्रविष्ट कराकर मेमोरी में उचित स्थान पर स्टोर कर सकते हैं। 

आवश्यकता पड़ने पर ALU मैमोरी से ही डेटा तथा निर्देश लेती है, जहां कंट्रोल यूनिट के आदेश के अनुसार उन पर विभिन्न क्रियाएं की जाती है और परिणाम आउटपुट यूनिट को प्रेषित कर दिए जाते है या पुनः मैमोरी में ही रख दिए जाते हैं। अन्य सभी यूनिट, कंट्रोल यूनिट के नियंत्रण में कार्य करती हैं।

कम्प्यूटर के पांच भागों में से अंतिम तीन भागों – मैमोरी, ALU, तथा CU को सम्मिलित रूप से सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट मतलब सीपीयू (CPU) कहा जाता है।

आइए अब कंप्यूटर की विशेषताओं के बारे में भी थोड़ा जान लेते हैं:

कम्प्यूटर की विशेताएं (Characteristcs of Computer):

1. गति (Speed):

कम्प्यूटर पल भर में लाखो गणनाएं कर सकता है। यह इतना तीव्र होता है कि एक सेकेंड में हजारों लाखों गणितीय संक्रियाएं एक साथ कर सकता है अर्थात कम्प्यूटर में आंकड़ों को तीव्र गति से संशोधित किया जा सकता है। वर्तमान में, कम्प्यूटर नैनो सेकेंड (10 power -9 सेकेंड) में गणना कर सकता है।

शुद्धता (Accuracy):

कम्प्यूटर कठिन से कठिन प्रश्न का भी बिना किसी त्रुटि के सही परिणाम देता है। इसमें शुद्ध निर्देशो एवं आंकड़ों के द्वारा त्रुटि विहीन सूचनाएं प्राप्त होती हैं। 

प्रोग्रामर द्वारा गलत प्रोग्राम बनाने के कारण कभी कभी कम्प्यूटर गलत सूचनाएं डेटा है, परन्तु इसके दिए गए परिणाम सदैव शुद्ध व सही होते हैं।

भंडारण (Storage):

कम्प्यूटर अपनी मैमोरी में सूचनाओं का विशाल भंडार संचित कर सकता है। इसमें शुद्ध आंकड़ों एवं प्रोग्रामों के भंडार की क्षमता होती है। 

कम्प्यूटर के बाह्य (External) तथा आंतरिक (Internal) संग्रहण माध्यमों (हार्ड डिस्क, सीडी रोम आदि) में डेटा और सूचनाओं का संग्रहण किया जा सकता है, जिसे हम प्रायः प्रयोग कर सकते हैं।

सक्षमता (Diligence):

एक मशीन होने के कारण कम्प्यूटर पर बाहरी वातारण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वह किसी भी कार्य को बिना रुके लाखो करोड़ो बार कर सकता है। 

यह अपने कार्य में सक्षम भूमिका निभाता है, यही कारण है कि कम्प्यूटर की उपरोक्त सभी विशेषताएं उसे एक काबिल मशीन बनती हैं।

बहुउद्देशीय (Versatile):

कंप्यूटर एक बेहतरीन मशीन है। इसका उपयोग भिन्न क्षेत्रों में विभिन्न कार्यों को संपादित करने में किया जाता है। इसका उपयोग शिक्षा, चिकित्सा, वैज्ञानिक, खगोशास्त्र, शोध, खेलकूद, ज्योतिष, साहित्य एवं प्रकाशन आदि क्षेत्रों में किया जाता है।

विश्वसनीयता (Reliability):

कम्प्यूटर में याद रखने की शक्ति एवं शुद्धता बहुत उच्च कोटि की होती है  इसलिए इसमें या इससे जुड़ी सभी क्रियाएं विश्वसनीय होती है। 

यह वर्षों तक कार्य करने के बाद भी थकता नहीं है तथा कई वर्षों के बाद भी यह अपनी मैमोरी में से डेटा को बिना किसी परेशानी के प्रदान कर सकता है।

कम्प्यूटर की सीमाएं (Limitations of Computer)

कम्प्यूटर की कुछ सीमाएं निम्नलिखित है:

विवेकहीनता (Indiacreetly):

कम्प्यूटर विवेकहीनता होता है इसलिए यह स्वयं के विवेक के अनुसार निर्णय नहीं ले सकता। यह मनुष्य द्वारा संगृहीत निर्देशो और सॉफ्टवेर प्रोग्राम के अनुसार ही निर्णय लेकर प्रक्रिया करता है।

भावुकता का अभाव (Lack of Emotions):

कम्प्यूटर मनुष्य के समान मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप भावनाएं प्रकट नहीं कर सकता। यह न व्यापार विश्लेषण से प्राप्त लाभ से हर्षित होकर प्रकट करता है, न कि हानि के निष्कर्ष को शोक के साथ। अतः इसमें भावुकता की अनुपस्थिति होती है।

विद्युत पर निर्भरता (Depends on Electricity):

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जिस कारण कम्प्यूटर को क्रियाशील करने के लिए विद्युत अनिवार्य है। विद्युत के अभाव में कम्प्यूटर एक डिब्बे के समान होता है।

वायरस से प्रभाव (Effects from Virus):

कोई भी वायरस, कम्प्यूटर की कार्यक्षमता को प्रभावित करके उसमे संगृहीत सूचना तथा निर्देशों को नष्ट कर सकता है।

कम्प्यूटर का वर्गीकरण

आकार के आधार पर कम्प्यूटर चार प्रकार के होते हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:

1. माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer)

यह कम्प्यूटर आकार में इतने छोटे होते है कि आप इन्हे डेस्क (Desk) में बहुत ही सरलतापूर्वक रखा जा सकता था। इन्हे कंप्यूटर ऑन ए चिप कहा जाता था।

वर्तमान में माइक्रो कम्प्यूटर फोन के आकार घड़ी के आकार पुस्तक के आकार तक में उपलब्ध है।

जैसे; – IMAC, IBM, PS/2, APPLE MAC इत्यादि।

माइक्रो कंप्यूटर कई प्रकार के होते है जैसे: डेस्कटॉप कम्प्यूटर, लैपटॉप, Palmtop, टैबलेट कम्प्यूटर, पर्सनल कम्प्यूटर, पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट.

2. मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer):

इस प्रकार के कम्प्यूटर में एक या एक से अधिक व्यक्ति एक समय में एक से अधिक कार्य कर सकते हैं। इनका उपयोग प्रायः छोटी या मध्यम स्तर की कंपनियां करती है। मिनी कम्प्यूटर की गति 10 से 30 MIPS होती है। 

जैसे; – HP 9000, RISC 6000, BULL HN-DPX2 और AS 400 आदि।

3. मेनफ्रेम कम्प्यूटर (mainframe Computer):

ये कम्प्यूटर आकार, कार्यक्षमता और कीमत में मिनी तथा माइक्रो कम्प्यूटर से अधिक बड़े होते है। अतः बड़ी कंपनियों तथा बैंको या सरकारी विभागों में एक केंद्रीय कम्प्यूटर के रूप में इनका प्रयोग होता है। 

Mainframe Computer को एक्सेस करने के लिए उपयोगकर्ता प्राय: नोड का इस्तेमाल करते हैं। 

अधिकतर कंपनियों में मेनफ्रेम कम्प्यूटरों का उपयोग भुगतान का ब्यौरा रखने, बिलों को भेजने, कर्मचारियों का भुगतान करने, उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी वस्तुओं का ब्यौरा रखने इत्यादि कार्यों में किया जाता है; जैसे CRAY-1, CDS-CYBER, IBM 4381, आईसीएल 39, UNIVAC – 1110 आदि।

4. सुपर कंप्यूटर (Super Computer):

ये कम्प्यूटर सर्वाधिक गति, संग्रह क्षमता एवम उच्च विस्तार वाले होते हैं। इनका आकार एक समान्य कमरे के बराबर होता है। 

विश्व का प्रथम सुपर कंप्यूटर ‘ क्रे रिसर्च कंपनी’ द्वारा वर्ष 1976 में विकसित क्रे -1 (Cray – 1) था भारत के पास भी एक सुपर कम्प्यूटर है जिसका नाम परम (PARAM) है। 

इसका विकास C-DAC ने किया था। इसका विकसित रूप ‘ परम – 10000’ भी तैयार कर लिया गया है।

सुपर कम्प्यूटर का मुख्य उपयोग भविष्वाणी करने, एनीमेशन तथा चलचित्र का निर्माण करने, अंतरिक्ष यात्रा के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए, बड़े वैज्ञानिक और शोध प्रयोगशाला में शोध व खोज करने के लिए किया जाता है।

जैसे: PARAM, PARAM-10000, CRAY-1, CRAY-2, NEC-500 आदि।

कार्य के आधार पर (On the Basis of Work):

कार्य के आधार पर कम्प्यूटर तीन प्रकार के होते है आइए इन तीन के बारे में संक्षिप्त में जानते है:

1. एनालॉग कम्प्यूटर (Analog Computer):

इस कंप्यूटर का इस्तेमाल भौतिक मात्राओं; जैसे – दाब, तापमान, लंबाई, पारा इत्यादि को मापकर उनके परिणाम को अंको में प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है इसलिए इनका उपयोग विज्ञान और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में अधिक किया जाता है; जैसे स्पीडोमीटर, भूकंप सूचक यंत्र आदि।

2. डिजिटल कम्प्यूटर ( Digital Computer):

डिजिटल कम्प्यूटर का उपयोग अंको की गणना करने के लिए किया जाता है। आधुनिक युग में , प्रयुक्त अधिकतर कम्प्यूटर डिजिटल कम्प्यूटर की श्रेणी में ही आते हैं। 

ये इनपुट किए गए डेटा और प्रोग्राम्स को 0 और 1 में परिवर्तित करके इन्हे इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत करते हैं। 

डिजिटल कम्प्यूटर का उपयोग व्यापार में, घर के बजट में तथा एनीमेशन के क्षेत्र में विस्तृत रूप से किया जाता है; जैसे – डेस्कटॉप कम्प्यूटर , लैपटॉप आदि।

3. हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer):

हाइब्रिड कम्प्यूटर उन कम्प्यूटरों को कहा जाता है जिनमे एनालॉग और डिजिटल दोनों कम्प्यूटर के गुण सम्मिलित हों अर्थात एनालॉग तथा डिजिटल के मिश्रित रूप को हाइब्रिड कम्प्यूटर कहा जाता है। 

इसके द्वारा भौतिक मात्राओं को अंको में परिवर्तित करके उन्हें डिजिटल रूप में ले आते है। चिकित्सा के क्षेत्र में इसका सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है।

जैसे – ECG और DIALYSIS मशीन।

उद्देश्य के आधार पर (On the Basis of Purpose):

उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटर दो प्रकार के होते हैं आइए इनके बारे में संक्षिप्त में जानते हैं

1. सामान्य उद्देश्य कम्प्यूटर (General Purpose Computer):

सामान्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इन कम्प्यूटरों का प्रयोग किया जाता है। इनके द्वारा दस्तावेज तैयार करने, उन्हें छपने, डेटाबेस बनाने तथा शब्द प्रक्रिया द्वारा पत्र तैयार करने इत्यादि सामान्य कार्य किए जाते है।

2. विशिष्ट उद्दशीय कम्प्यूटर (special Purpose Computer):

विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इन कम्प्यूटरों का प्रयोग किया जाता है। इनका उपयोग अंतरिक्ष विज्ञान,  मौसम विज्ञान , उपग्रह संचालन, यातायात नियंत्रण, कृषि – विज्ञान, इंजीनियरिंग, भौतिक तथा रासायनिक विज्ञान में शोध इत्यादि क्षेत्रों में विशिष्ट उद्देश्यों के लिए किया जाता है। 

इसमें प्रयोग किए गए CPU की क्षमता अधिक तीव्र होती है, जिस कारण विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति होती है।

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