इंटरनेट क्या है? इसका विकास कैसे हुआ?

 हैलो दोस्तो आप सभी लोगो का एक बार फिर से स्वागत है हमारे ब्लॉग के एक नए पोस्ट पर दोस्तो आज का पोस्ट बहुत ही इंट्रेस्टिंग होने वाला है आज हम एक बहुत ही इंट्रेस्टिंग टॉपिक इंटरनेट के बारे में बात करने वाले है दोस्तों आज के इस दौर में इंटरनेट का इस्तेमाल बच्चे बूढ़े जवान लगभग सभी लोग करते हैं, आज हम इसी के बारे में जानने वाले है; जैसे - इंटरनेट क्या है? इंटरनेट का विकास कैसे हुआ? इंटरनेट के एलिमनेट्स क्या क्या होता है? और इसके एडवांटेज और डिसएडवांटेज के बारे में बात करेंगे तो चलिए शुरुवात से जानते हैं -

इंटरनेट क्या है


इंटरनेट क्या है? (What is Internet?)

दोस्तों इंटरनेट कम्प्यूटरों का एक विशाल नेटवर्क है, जिसे कोई भी आदमी एक्सेस कर उपयोग कर सकता है। इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान बड़ी सरलता से किया जा सकता है। इंटरनेट को नेटवर्कों का नेटवर्क भी कहा जाता है, जिसके अन्तर्गत बहुत सारे उपयोगकर्ता, संस्थाएं, व्यावसायिक एवम् सरकारी विभाग सम्मिलित होते हैं। इसी को इंटरनेट कहा जाता है आइए अब जानते हैं कि इंटरनेट का विकास किस प्रकार से हुआ है -


इंटरनेट का विकास (Development of Internet)

पच्चास एवम् साठ के दशक में कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से अमेरिका के रक्षा विभाग ने DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) प्रोजेक्ट की स्थापना की थी, जिसका लक्ष्य तकनीकी श्रेष्ठता को प्राप्त करना था। DARPA को प्रारम्भ में ARPA (Advanced Research Projects Agency) के संक्षिप्त नाम से जाना गया। इसके फलस्वरूप इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग टेनेक्स ऑफिस (Information Processing Techniques Office) का निर्माण किया गया, जिसे और आगे बढ़ाते हुवे सेमी - ऑटोमैटिक ग्राउंड एन्वायरमेंट [Semi-Automatic Ground Environment (SAGE)] प्रोग्राम का विकास हुआ।


अक्टूबर 1962 में DARPA ने औपचारिक नेटवर्किंग की रिसर्च शुरू की, इस नेटवर्क प्रोजेक्ट के अन्तर्गत ARPANET (Advanced Resarch Projects Agency Network) का पहला लिंक 21 नवम्बर, 1969 को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय एवम् स्टैंडर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के मध्य स्थापित हुआ था।


5 दिसम्बर 1969 तक इस नेटवर्क के चार नोड्स इंस्टाल (Install) हो गए थे। इसमें प्रयोग होने वाला होस्ट सॉफ्टवेयर RFC1 है, जिसे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के स्टीव क्रोकर (Steve Crocker) के द्वारा अप्रैल 1969 में लिखा गया था। वर्ष 1972 में इस प्रोजेक्ट का आधिकारिक नाम ALOTTNET से बदल कर ARPANET ही कर दिया गया था। ARPANET का संपूर्ण RFC (Request for Comments) के ऊपर केंद्रित था, जिसका प्रयोग आज भी इंटरनेट प्रोटोकॉल्स में हो रहा है।


ARPANET का लिंक NSFNet (National Science Foundation Network) होने के बाद इंटरनेट शब्द का प्रयोग और अधिक होने लगा, जिसका प्रयोग उस नेटवर्क के लिए किया जाता था, जो नेटवर्क TCP/IP को प्रयोग करता था। इंटरनेट प्रोटोकॉल नामक शब्द का प्रयोग जीरॉक्स नेटवर्क सिस्टम (Xerox Network System -XNS) के द्वारा नेटवर्क सिस्टमों के संदर्भ में किया था।


ARPANET का अमेरिका से बाहर पहला नेटवर्क कनेक्शन NORSAR था, जो वर्ष 1973 में अमेरिका एवम् नॉर्वे के मध्य स्थापित हुआ था। वर्ष 1984 से 1988 तक CERN ने TCP/IP को अपने सभी मुख्य कम्प्यूटरों और वर्कस्टेशन में इंस्टाल कर लिया था।


एशिया में इंटरनेट का चलन वर्ष 1980 के बाद शुरू हुआ था। भारतवर्ष 1995 में VSNL (Videsh Sanchar Nigam Limited) ने इंटरनेट सेवा प्रारंभ की थी

 तब से लेकर आज तक इंटरनेट कनेक्शनों में लगातार वृद्ध हो रही है। वर्तमान समय में, अनेक इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) हमारे देश में है, जो ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराते हैं।

अब चलिए इंटरनेट के तत्वों को जानते हैं -


इंटरनेट के तत्व (Elements of Internet)

दोस्तों इंटरनेट को एक नेटवर्क मानकर इसके विभिन्न तत्वों को परिभाषित किया जा सकता है -


क्लाइंट कम्प्यूटर (Client Computer)

वे कम्प्यूटर जो टेलीफोन लाइन या केबल कनेक्शन के द्वारा इंटरनेट से जुड़ते हैं, क्लाइंट कम्प्यूटर कहलाती है।


सर्वर कम्प्यूटर (Server Computer)

वे कम्प्यूटर जिनसे क्लाइंट जुड़ते हैं, सर्वर कम्प्यूटर कहलाते हैं। सर्वर कम्प्यूटर एक ही समय में अनेक क्लाइंट कम्प्यूटर्स द्वारा मांगी सूचनाओं और वेबसाइटों को एक साथ प्रदान कराने में सक्षम होते है।


नोड (Node)

इंटरनेट पर किसी भी क्लाइंट, सर्वर या कम्प्यूटर को नोड कहते हैं।


यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (Uniform Resource Locator)


इंटरनेट पर किसी सर्वर या सेवा के नाम को व्यक्त करने वाला पता URL कहलाता है। यह एक निश्चित मापक है, जो किसी सूचना को इंटरनेट पर व्यक्त करता है। URL के चार भाग होते हैं


प्रोटोकॉल (Protocol) 

किसी कम्प्यूटर नेटवर्क के किन्हीं दो नोड के मध्य डाटा ट्रांसमिशन की प्रक्रिया के सम्पन्न होने के नियम एवम् विधियों के समूह को प्रोटोकॉल कहते हैं; जैसे - HTTP (Hyper Text Transfer Protocol)।


सर्वर नेम (Server Name)

यह वेब ब्राउज़र द्वारा एक्सेस किया जाने वाला सर्वर है, इस भाग में बताए गए सर्वर में ही वांछित वेब पेज स्टोर होते हैं।


फाइल नेम (File Name)

यह यूआरएल का तीसरा भाग है। इसमें दूसरे भाग में बताए गए सर्वर नेम में स्टोर फाइल का नाम होता है, जिसे एक्सेस कर क्लाइंट मिशन तक लाया जाता है।


फाइल पाथ (File Path)

इस भाग में फाइल के नाम से पहले उन डायरेक्ट्री का नाम दिया होता है, जिनके अंदर फाइल स्टोर होती है।

उदाहरण,

"http://www.alberchhawkton.com/device/input/keyboard.html" में दिए गए URL से "keyboard.html" फाइल को एक्सेस किया जा सकता है, जो www.albarchhawkton.com एड्रेस के सर्वर पर Devices डायरेक्ट्री के सब डायरेक्ट्री इनपुट में स्टोर है।


हाइपर टेक्स्ट (HyperText)

यह एक सूचना प्रेजेंटेशन की ऐसी प्रणाली है, जिसमें इमेज, टेक्स्ट , ध्वनि एवम् क्रियाओं के परस्पर लिंक जुड़े हुए रहते हैं, जिससे टेक्स्ट को लगातार पढ़े बिना इच्छित टॉपिक का विवरण माउस क्लिक से प्राप्त किया जा सके। हाइपर टेक्स्ट एक नॉन - लीनियर (Non- Linear) पाठ्य सामग्री है, जिसे पुस्तक के समान पढ़ने के अतिरिक्त इच्छानुसार मध्य में से भी सूचना प्राप्त की जा सकती है।


इंटरनेट के लाभ (Advantages of Internet)

इंटरनेट के उपयोग से अनेक लाभ होते हैं। इनमें से कुछ विशेष लाभों को नीचे संक्षेप में बताया गया है


  • इंटरनेट के मध्य से हम कोई भी सूचना, चित्र, वीडियो आदि दुनिया के किसी भी कोने से किसी भी कोने तक क्षण मात्र में पहुंचा सकते हैं।


  • इंटरनेट के माध्यम से ईमेल भेज और प्राप्त कर सकते हैं। यह संदेश भेजने और प्राप्त करने का सबसे सरल और सस्ता माध्यम है।


  • इंटरनेट के माध्यम से हम दुनिया की किसी भी जगह उपस्थित अपने मित्र या संबंधी से इंटरनेट चैटिंग के द्वारा बातचीत कर सकते है।


  • इंटरनेट से हम किसी भी विषय पर अपनी आवश्यकतानुसार सूचनाएं घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। वर्ल्ड वाइड वेब में सूचनाओं को शीर्षकों और उपशिर्षकों में बांटा गया है।


  • इंटरनेट के माध्यम से हम अपने विचारो और वस्तुओं को संसारभर में प्रचलित कर सकते हैं। यह विज्ञापन का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।


  • इंटरनेट के माध्यम से हम व्यापार कर सकते हैं और अपनी वस्तुओं तथा सेवाओं का क्रय विक्रय भी कर सकते हैं।


  • इंटरनेट के माध्यम से हम विभिन्न प्रतियोगिताओं में हम भाग ले सकते हैं और नौकरी या रोजगार के लिए अपना बायोडेटा भी इंटरनेट पर डाल सकते हैं।


  • इंटरनेट के माध्यम से खेल भी खेले जा सकते हैं तथा अनेक प्रकार के मनोरंजन के साधनों का आनंद प्राप्त किया जा सकता है।


इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर Internet Service Provider - ISP


आईएसपी (ISP) एक संस्था है, जो इंटरनेट को एक्सेस करने के लिए सर्विस प्रदान करती है। ISP को कई रूपों में व्यवस्थित किया जा सकता है; जैसे - कॉमर्शियल (Commercial), कम्युनिटी- आउंड (Community - Owned), नों प्रॉफिट (Non Profit) आदि। यह कई प्रकार की सर्विस प्रदान करता है; जैसे - इंटरनेट एक्सेस (Internet Access), इंटरनेट ट्रांसिट (Internet Transit), डोमेन नेम रजिस्ट्रेशन (Domain Name Registration), वेब होस्टिंग (Web Hosting) आदि।


इंटरनेट के लाभों की यह सूची पूर्ण नहीं है, वास्तव में इंटरनेट के लाभों को पूर्ण रूप से बता पाना असम्भव है। जैसे जैसे इसका विस्तार होता जा रहा है वैसे वैसे इंटरनेट की उपयोगिता भी बढ़ती जा रही है।

आइए इंटरनेट की हानियों को जानते हैं


इंटरनेट की हानियां (Disadvantages of Internet)

इंटरनेट की हानियां निम्न हैं -

  • कम्प्यूटर में वायरस के लिए यह सार्वधिक उत्तरदाई होते हैं।


  • इंटरनेट पर भेजें गए संदेशों को सरलता से चुराया का सकता है।


  • बहुत सी सूचनाओं जांची नहीं जाती, जो गलत या असंगत भी हो सकती है।


  • साइबर धोखेबाज क्रेडिट / डेबिट कार्ड की समस्त सूचनाओं को चुराकर गलत तरीके से प्रयोग कर सकते हैं।





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