नेटवर्किंग युक्तियां क्या है और यह कितने प्रकार का होता है?

 नमस्कार दोस्तों एक बार फिर से आप सभी का स्वागत है हमारे ब्लॉग पर दोस्तो पिछली पोस्ट में हमने जाना था कि संचार मीडिया क्या है अगर आपने वह पोस्ट नहीं पढ़ा है तो आप पढ़ सकते हैं फ्रेंड्स आज के इस पोस्ट में एक महत्वपूर्ण टॉपिक नेटवर्किंग युक्तियों के बारे में बात करने वाले है। नेटवर्क युक्ति क्या है और इसका क्या प्रयोग होता है? कितने प्रकार का होता है? आइए शुरू करते हैं और सबसे पहले जानते हैं कि नेटवर्किंग युक्ति क्या है?

नेटवर्किंग युक्तियां क्या है


नेटवर्किंग युक्ति क्या है? (What is Networking Device)

फ्रेंड्स सिग्नल्स की वास्तविक शक्ति को बढ़ाने के लिए नेटवर्किंग युक्तियों का प्रयोग किया जाता है। अर्थात आप समझ ही गए होंगे कि नेटवर्किंग में उपयोग होने वाले उपकरण को नेटवर्किंग युक्ति कहते हैं। इसके अतिरिक्त नेटवर्किंग युक्तियों का प्रयोग दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए भी किया जाता है। 


आइए कुछ नेटवर्किंग युक्तियों के बारे में जानते हैं -

मॉडम (Modem)

यह मोड्युलेटर - डिमोड्युलेटर का संक्षिप्त नाम है। मॉडम एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल्स में तथा डिजिटल सिग्नल्स को एनालॉग सिग्नल्स में बदलता है। मॉडम को सदैव टेलीफोन लाइन तथा कम्प्यूटर के मध्य लगाया जाता है डिजिटल सिग्नल्स को एनालॉग सिग्नल्स में बदलने की प्रक्रिया को मॉड्यूलेशन तथा एनालॉग सिग्नल्स को डिजिटल सिग्नल्स में बदलने की प्रक्रिया को डिमॉड्यूलेशन कहते हैं।

आइए जानते हैं मॉडम कितने प्रकार का होता है


मॉडम के मूल प्रकार (Basic Types of Modem)


1. बाह्य मॉडम (External Modem)

यह साधारण प्रकार का मॉडम होता है, जो कम्प्यूटर में स्थित न होकर, अलग से डिवाइस के रूप में होता है। बाह्य मॉडम कम्प्यूटर के सीरियल पोर्ट में एक केबल के द्वारा जोड़ा जाता है, उसमे स्वयं को पावर सप्लाई होती है।


2. आंतरिक मॉडम (Internal Modem)

यह कम्प्यूटर ज आंतरिक भाग में इंस्टाल रहता है। जब किसी प्रोग्राम को रन किया जाता है, तो आंतरिक मॉडम अपने आप एक्टिवेट हो जाता है तथा जब प्रोग्राम से बाहर निकलते हैं (Exit करते है) तो आंतरिक मॉडम अपने आप ऑफ (Off) हो जाता है।


3. पीसी कार्ड मॉडम (PC Card Modem)

इस प्रकार के मॉडम को पोर्टेबल कम्प्यूटर (जैसे लैपटॉप) के लिए डिजाइन किया जाता गया है। पीसी मॉडम बाह्य तथा आंतरिक मॉडम का सायोंजन (Combination) होता है।


4. वायरलैस मॉडम (Wireless Modem) 

यह मॉडम बाह्य मॉडम, आंतरिक मॉडम या पीसी कार्ड मॉडम, किसी भी प्रकार का हो सकता है। अन्य सभी मॉडमों को पीसी से जोड़ने के लिए तार की आवश्यकता होती है, परंतु वायरलैस मॉडम बिना किसी तार के सिग्नलों (संकेतो) को भेजता तथा प्राप्त करता है।


5. रिपीटर (Repeter)

यह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते है, जो निम्न स्तर (Low Level) के सिग्नल्स को प्राप्त (Receive) करके, उन्हें उच्च स्तर (High Level) का बनाकर वापस भेजता है। इस प्रकार के सिग्नल्स लंबी दूरियों को बिना बधा के तय कर सकते हैं। रिपोर्टर्स कमजोर पड़ चुके सिग्नल एवम् उनसे होने वाली समस्याओं से बचाता है। रिपोर्टर्स का प्रयोग नेटवर्क में कम्प्यूटरों को एक दूसरे से जोड़ने वाले केबल की लंबाई बढ़ाने में किया जाता है। इनकी उपयोगिता सर्वधिक उस समय होती है, जब कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए काफी लंबी केबल की आवश्यकता होती है।


हब (Hub)

हब का प्रयोग ऐसे स्थान पर किया जाता है, जहां नेटवर्क की सारी केबल मिलती है। ये एक प्रकार का रिपीटर होता है, जिसमें नेटवर्क चैनलों को जोड़ने के लिए पोर्ट्स लगे होते हैं। सामान्यतया एक हब में 4, 8, 16, अथवा 24 लगे होते हैं। इसके अतिरिक्त हब पर प्रत्येक पोर्ट के लिए एक इंडिकेटर लाइट (Light Emitting Diode) लगी होती है। जब पोर्ट से जुड़ा कम्प्यूटर ऑन होता है, तब लाइट जलती रहती है। हब में कम्प्यूटरों को जोड़ना अथवा हबों को आपस में जोड़ना या घटना बहुत ही सरल होता है।

एक बड़े हब में लगभग 24 कम्प्यूटरों को जोड़ा जा सकता है। इससे अधिक कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए एक अतिरिक्त हब का प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया (दो - या - दो से अधिक हबो को आपस में जोड़ने) को डेजी चेनिंग कहते हैं। हब ओएसआई मॉडल (OSI Model) के फिजिकल लेयर पर कार्य करता है।


हब के मूल प्रकार (Basic Type of Hub)


1. पैसिव हब (Passive Hub)

इस हब के लिए विद्युत स्रोत की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि ये किसी सिग्नल को फिर से उत्पन्न नहीं करता। पैसिव हब में केबल की लंबाई अधिक प्रयोग की जाती है, इसलिए पैसिव हब का उपयोग लगभग पूरी तरह से समाप्त हो गया है। पैसिव हबों को कभी कभी कंसरंट्रेटर (Concentrator) भी कहा जाता है।


2. एक्टिव हब (Active Hub)

एक्टिव हब आवश्यकता होने पर सिग्नलों को फिर से उत्पन्न करते हैं। अतः इनके लिए विद्युत कनेक्शन की भी आवश्यकता होती है। एक्टिव हब रिपीटर का भी कार्य करता है।


3. इंटेलिजेंट (Intelligent Hub)

इस हब का प्रयोग नेटवर्क मैनेजमेंट में किया जाता है। यह हब कॉलिजन डिटेक्शन में भाग लेता है। यह हब एक से अधिक टोपोलॉजी की सुविधा प्रदान करता है तथा अभ्यास लैन (Virtual LAN) बनाने में भी प्रयोग किया जाता है।


ब्रिज (Bridge)

यह छोटे नेटवर्क को आपस में जोड़ने के काम आते हैं, ताकि ये आपस में जुड़कर अक बड़े नेटवर्क की भांति कार्य कर सकें। ब्रिज एक बड़े या व्यस्त नेटवर्क को छोटे हिस्सों में वितरित (Distribute) करने का भी कार्य करता है। व्यस्त नेटवर्क अलग रखा जाना हो।

आइए ब्रिज के भी मूल प्रकार के बारे में जान लें -

ब्रिज के मूल प्रकार (Basic Type of Bridge)


1. लोकल ब्रिज (Local Bridge) 

यह लोकल एरिया नेटवर्क को आपस में सीधे जोड़ता है।


2. रिमोट ब्रिज (Remote Bridge) 

इस ब्रिज का प्रयोग दो या दो से अधिक दूर स्थित LAN को जोड़ने के लिए किया जाता है। प्रायः कंपनी लैनों को इसलिए जोड़ती है, ताकि वे बड़े लैन कि भांति कार्य कर सकें।


3. वायरलैस (Wireless Bridge)

यह रिमोट ब्रिज की भांति हो सकते हैं। जब दो लैनो के ब्रिज को सीधी लाइन द्वारा जोड़ना सम्भव न हो, तो उन्हें वायरलैस ब्रिज द्वारा जोड़ा जा सकता है। ऐसे ब्रिज को सैटेलाइट ब्रिज भी कहा जाता है।


राउटर (Router)

राउटर का प्रयोग नेटवर्क में डेटा को कहीं भी भेजने के लिए करते हैं, इस प्रक्रिया को राउटिंग कहते हैं। राउटर एक जंक्शन कि भांति कार्य करते हैं। बड़े नेटवर्को में एक से अधिक रूट होते है, जिनके द्वारा सूचनाएं अपने गंतव्य (Destination) तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में राउटर्स ये निश्चय करते हैं कि किसी सूचना को किस रास्ते से उसके गंतव्य तक पहुंचना है।


स्विच (Switch)

स्विच वे हार्डवेयर होते है, जो विभिन्न कम्प्यूटरों को एक LAN में जोड़ते हैं। स्विच को हब के स्थान पर उपयोग किया जाता है, हब तथा स्विच के मध्य एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि हब स्वयं तक आने वाले डेटा को अपने प्रत्येक पोर्ट पर भेजता है, जबकि स्विच स्वयं तक आने वाले डेटा को केवल उसके गंतव्य (Destination) तक भेजता है।


राउटिंग स्विच Routing Switch

ऐसे स्विच जिनमें राउटर और ब्रिज दोनों की क्षमताएं होती है, उन्हें राउटिंग स्विच कहा जाता है। राउटिंग स्विच नेटवर्क के किसी कम्प्यूटर तक भेजी जाने वाली सूचनाओं को पहचानकर, उन्हें रास्ता दर्शाते हैं। राउटिंग स्विच, सूचनाओं को सबसे सही रास्ता खोजकर उनके गंतव्य (Destination) तक पहुंचता है।


स्विच के मूल प्रकार (Basic Type of Switch)

1. अनमैनेज्ड स्विच (Unmanaged Switch) 

इस प्रकार के स्विच साधारण प्रकार के होते हैं, जिनमे कॉन्फ़िगरेशन करने का कोई विकल्प नहीं होता है। ये प्लग एंड प्ले (Plug and Play) प्रकार के उपकरण होते हैं। इस प्रकार के स्विच का प्रयोग सामान्यतया घरों, ऑफिसों में किया जाता है।


2. मैनेज्ड स्विच (Managed Switch)

मैनेज्ड स्विच का प्रयोग कार्य को नियंत्रित करने या सुधार करने के लिए किया जाता है। ऐसे स्विचों के कॉन्फ़िगरेशन में कई परिवर्तन किए जा सकते हैं। मैनेज्ड स्विच भी दो प्रकार के होते हैं - स्मार्ट (इंटेलिजेंट) स्विच और इंटरप्राइज मैनेज्ड (फुली मैनेज्ड) स्विच।


ब्राउटर (Brouter)

Brouter शब्द ब्रिज और राउटर से मिलकर बना है। यह एक ऐसा उपकरण होता है, जो कभी राउटर की भांति और कभी ब्रिज की भांति व्यवहार करता है। ये दो प्रकार के होते हैं - सिंगल प्रोटोकॉल (Single Protocol) तथा मल्टी प्रोटोकॉल (Multi Protocol)।


गेटवे (Gateway)

यह एक ऐसी युक्ति है, जिसका प्रयोग दो विभिन्न नेटवर्क प्रोटोकॉल्स को जोड़ने के लिए किया जाता है। इन्हें प्रोटोकॉल परिवर्तक (Protocol Converters) भी कहते हैं। ये फायरवॉल की भांति कार्य करते हैं। गेटवे का कार्य राउटर या स्विच की तुलना में अधिक जटिल है।


मुझे उम्मीद है कि आपको हमारा यह पोस्ट आपके लिए हेल्पफुल और आपको जरूर पसंद आया होगा कॉमेंट में जरूर अपना राय दें। और इस पोस्ट को लेकर कोई सुझाव है तो हमें बताएं।

धन्यवाद्।


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