नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है? इसके प्रकार और एडवांटेज और डिसएडवांटेज

 नमस्कार दोस्तों एक बार फिर से आप सभी लोगो का स्वागत करता हूं हमारे ब्लॉग पर फ्रेंड्स आज के इस पोस्ट में कम्प्यूटर से जुड़े हुए एक महत्वपूर्ण टॉपिक नेटवर्क टोपोलॉजी के बारे में जानने वाले है, पिछली पोस्ट में हमने कम्प्यूटर नेटवर्क क्या है इसके बारे में बताया है अगर अपने अभी तक वो पोस्ट नहीं पढ़ा है तो आप उसे पढ़ सकते है आज के पोस्ट में हमलोग नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है, यह कितने प्रकार का होता है और उनके प्रकारों के एडवांटेज और डिसएडवांटेज के बारे में जानने वाले है। आइए सबसे पहले जानते हैं कि नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है -

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है?(What is Network Topology)

टोपोलॉजी नेटवर्क में कम्प्यूटरों को जोडने की भौगोलिक व्यवस्था होती है। इसके द्वारा विभिन्न कम्प्यूटर्स एक दूसरे से परस्पर संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इसके भी कुछ प्रकार होते है आइए इसके बारे में भी जानते हैं -


नेटवर्क टोपोलॉजी के प्रकार कोन कोन से हैं? (Types of Network Topology)


बस टोपोलॉजी (Bus Topology)

इसे लीनियर टोपोलॉजी (Linear Topology) भी कहा जाता है। इस टोपोलॉजी में भी लंबे केबल से युक्तियां (Devices) जुड़ी होती है, जिसे बैकबोन (Back Bone) कहते हैं। इस नेटवर्क का इंस्टॉलेशन छोटे अथवा अल्पकालीन ब्रॉडकास्ट के लिए होता है, जहां अत्यंत उच्च गति के कम्युनिकेशन चैनल का प्रयोग सीमित क्षेत्र में किया जाता है।

आइए इसके एडवांटेज और डिसएडवांटेज को भी जानते हैं

लाभ (Advantages)

  • इसमें नए नोड जोड़ना अथवा पुराने नोड हटाना बहुत सरल होता है।

  • किसी एक कम्प्यूटर के खराब होने पर सम्पूर्ण नेटवर्क सरलता से कार्य करता है।
  • इसकी लागत बहुत कम होती है।


हानियां (Disadvantages)

  • मुख्य केबल में यदि रुकावट आती है, तो पूरा नेटवर्क बंद हो जाती है।

  • यदि पूरा नेटवर्क बंद होता है, तो इस समस्या को पहचानने में कठिनाई आती है।
  • एक समय में एक ही पैकेट ट्रांसमिट हो सकती है।


स्टार टोपोलॉजी (Star Topology)

इस टोपोलॉजी के अन्तर्गत एक होस्ट कम्प्यूटर होता है, जिससे विभिन्न लोकल कम्प्यूटरों या नोड्स (Nodes) को सीधे जोड़ा जाता है, यह होस्ट कम्प्यूटर हब (Hub) कहलाता है। यदि हब खराब हो जाए तो पूरा नेटवर्क खराब हो सकता है। इसमें किसी नोड और हब के बीच प्वॉइंट टू प्वॉइंट (Point to point) कनेक्शन होती है।

कोई भी दो केंद्रीय (Central) कम्प्यूटर के माध्यम से ही कम्युनिकेट करती हैं, जिससे टकराव (Collison) की समस्या नहीं होती।

आइए अब इसकी एडवांटेज के बारे में जानते हैं -

लाभ (Advantages)

  • यदि कोई नोड (कम्प्यूटर) खराब हो जाए, तो नेटवर्क प्रभावित नहीं होता है। इस स्थिति में खराब हुवे नोड (कम्प्यूटर) को ज्ञात करना सरल होता है।
  • एक कम्प्यूटर को होस्ट कम्प्यूटर से जोड़ने में कम लागत आती है।
  • लोकल कम्प्यूटर की संख्या बढ़ाने से नेटवर्क की सूचना के आदान प्रदान कि क्षमता प्रभावित नहीं होती है।


हानियां (Disadvantage)

  • बस टोपोलॉजी की अपेक्षा अधिक लंबाई की आवश्यकता होती है।
  • यदि हब खराब हो जाता है, तो जुड़े हुए नोड्स भी बेकार हो जाते हैं।
  • बस टोपोलॉजी की तुलना में अधिक मूल्यवान (Expensive) है, क्योंकि इसमें प्रयोग होने वाली डिवाइसों की कीमत अधिक होती है।


रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology)

इस टोपोलॉजी में कोई होस्ट या हब नोड नहीं होती। सभी कम्प्यूटर्स एक गोलाकार आकृति के रूप में केबल द्वारा जुड़े होते हैं। प्रत्येक कम्प्यूटर अपने अधीनस्थ (Subordinate) कम्प्यूटर से जुड़ा होता है। गोलाकार आकृति में होने के कारण इसे सर्कुलर नेटवर्क भी कहा जाता है। इस टोपोलॉजी में डेटा केवल एक दिशा में गमन (Motion) करता है और यह तब तक प्रत्येक नोड में से होकर गुजरता है, जब तक कि वह अपने गंतव्य (Destination) पर न पहुंच जाएं।


लाभ (Advantages)

  • यह टोपोलॉजी सभी स्टेशनों के लिए एक समान एक्सेस उपलब्ध कराती है। नेटवर्क में अधिक स्टेशन होने पर भी इसका अक्जिक्यूशन (Execution) सभी स्टेशनों के लिए समान होता है।
  • इंटरफेस एक्टिव होने के कारण रिंग की लंबाई की कोई सीमा नहीं होती, अर्थात उसमे कितने भी स्टेशन हो सकते हैं।
  • नेटवर्क में किसी भी प्रकार के मीडियम का उपयोग किया जा सकता है।
  • इसमें डेटा में टकराव (Collision) नहीं होता, क्योंकि रिंग कई भागों में बंटी होती है।


हानियां (Disadvantages)

  • यह टोपोलॉजी कुछ जटिल होती है इसलिए इसको इंस्टॉल (Install) करना थोड़ा कठिन होता है।
  • इसमें माध्यम (medium) के असफल हो जाने पर पूरा नेटवर्क प्रभावित होता है।
  • इसमें कहीं कोई समस्या (Problem) आ जाने पर, उसे ज्ञात करना कठिन होता है।


मैश टोपोलॉजी (Mesh Topology)

इस टोपोलॉजी का प्रत्येक कम्प्यूटर, नेटवर्क में अन्य सभी कम्प्यूटरों से सीधे जोड़ा होता है। इसी कारण से इसे पावरप्वाइंट - टू - प्वॉइंट (Point- to-point) नेटवर्क या कम्प्लीटली कनेक्टेड (Comletely Connected) नेटवर्क भी कहा जाता है। इसके डेटा के आदान प्रदान का प्रत्येक निर्णय कम्प्यूटर निर्णय कम्प्यूटर स्वयं ही लेता है।


लाभ (Advantages)

  • डिवाइसों के मध्य संबद्धता (Relevancy) उपयोग होती है।
  • डिवाइसों के मध्य तारों कि स्थिति के कार्य पर कोई विपरित प्रभाव नहीं होता।
  • सुरक्षा की दृष्टि से अन्य टोपोलॉजी से बहुत बेहतर होता है।


हानियां (Disadvantages)

  • अतिरिक्त केबलों का व्यवस्थापन (Adjustment) अत्यंत जटिल होता है।
  • तारों (Wires) के मैश स्थिति में होने के कारण, उन्हें क्षति पहुंचने की प्रबल संभावना रहती है।


ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology)

यह टोपोलॉजी बस तथा स्टार टोपोलॉजी का मिश्रित रूप है। आइए टोपोलॉजी में एक केबल से दूसरी केबल तथा दूसरी केबल से तीसरी केबल, किसी पेड़ की शाखाओं (Branches) की भांति जुड़ी होती है, इस कारण यह ट्री टोपोलॉजी कहलाती है। सबसे ऊपर वाले नोड को इसी कारण यह ट्री टोपोलॉजी कहलाती है। सबसे ऊपर वाले नोड को रूट नोड (Root Nodes) कहा जाता है तथा इससे जुड़ने वाले अन्य नोड़ो को चाइल्ड नोड (Child Node) कहा जाता है।


लाभ (Advantages)

  • इस नेटवर्क का विस्तार संभव और सरल है।
  • यह त्रुटि करने तथा उसमे सुधार करने के लिए सरल है।


हानियां (Disadvantages)

  • इसकी सम्पूर्ण मुख्य सरंचना, मुख्य बस केबल पर निर्भर करती है, इसलिए यदि ये केबल टूट जाएं या खराब हो जाए, तो पूरा नेटवर्क खराब हो जाती है।
  • नेटवर्क की मापनियता (Scalability) केबल के प्रकार पर निर्भर करती है।



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धन्यवाद्


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