What is Operating System and What is it used for? (ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है और कम्प्यूटर में इसका क्या प्रयोग होता है?

म्प्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है और इसका क्या क्या कार्य होता है और यह कितने प्रकार का होता है ऑपरेटिंग सिस्टम से संबंधित इस प्रकार के जानकारी आप इस पोस्ट में जानेंगे

आइए सबसे पहले जानते है की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है


ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? (What is Operating System?)


ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो अन्य प्रोग्रामों को कम्प्यूटर में क्रियान्वित करता है। कोई भी प्रोग्राम कम्प्यूटर मशीन के संपर्क में आने से पूर्व ऑपरेटिंग सिस्टम के संपर्क में आता है। ऑपरेटिंग सिस्टम एक मास्टर कंट्रोल प्रोग्राम है, जो कंट्रोल करता है एवं एक कुशल नियंत्रक (Controller) की भूमिका निभाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है, जो कम्प्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर रिसोर्सेज (Resources); जैसे - मैमोरी, प्रोसेसर और इनपुट/आउटपुट डिवाइसेज एवं सॉफ्टवेयर को व्यवस्थित करता है। यह एक विशेष प्रोग्रामों का संग्रह (Collection) है। यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो कम्प्यूटर के विभिन्न अंगों को निर्देश देता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम यूज़र एवं कम्प्यूटर हार्डवेयर के मध्य एक इंटरफेस की भांति कार्य करता है।

विंडोज का पूरा नाम वाइड इंटर एक्टिव नेटवर्क डेवलपमेंट फॉर ऑफिस वर्क सॉल्यूशन है। माइक्रोसॉफ्ट विंडोज, पर्सनल कम्प्यूटर के लिए माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित ऑपरेटिंग सिस्टम है। विश्व के लगभग 90% पर्सनल कम्प्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग हो रहा है।
अब चलिए ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्यों के बारे में चर्चा करते है -

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य (Function of Operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर के सफल संचालन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह निम्न प्रकार के कार्य करता है

प्रोसेस मैनेजमेंट (Process Management)

ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोग्राम के सफल निष्पादन के लिए मैमोरी मैनेजमेंट का अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य करता है। कम्प्यूटर की मैमोरी में कुछ स्थान सुरक्षित रखे जाते हैं, जिनका विभाजन प्रोग्रामों के मध्य किया जाता है तथा साथ ही यह भी ध्यान रखा जाता है कि प्रोग्रामों को मैमोरी में अलग - अलग स्थान प्राप्त हो सके। ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य किसी भी प्रोग्राम को इनपुटिंग एवं आउट पुटिंग के समय आंकड़ों एवं सूचनाओं को अपने निर्धारित स्थान पर संग्रहीत करना होता है।


इनपुट आउटपुट डिवाइस मैनेजमेंट (Input - Output Device Management)


ऑपरेटिंग सिस्टम इनपुट यूनिट से डेटा को पढ़कर मैमोरी में उचित स्थान पर संग्रहीत करने एवं प्राप्त परिणाम को मैमोरी से आउटपुट यूनिट तक पहुंचने का कार्य करता है। प्रोग्राम लिखते समय कम्प्यूटर को केवल यह बताया जाता है कि हमें क्या इनपुट करना है और क्या आउटपुट लेना है, शेष कार्य ऑपरेटिंग सिस्टम ही करता है।

फाइल मैनेजमेंट (File Management)


ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलों को एक सुव्यस्थित ढ़ंग से किसी डायरेक्ट्री में संग्रहीत करने कि सुविधा प्रदान करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम किसी प्रोग्राम के निष्पादन के समय, इसे सेकंडरी मैमोरी से पढ़कर प्राइमरी मेमोरी में डालने का कार्य करता है।

आइए अब ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न प्रकार के बारे में चर्चा करते हैं

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार (Types of Operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम को उसके कार्य के आधार पर निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है

सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Single User Operating System)


यह ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय में एक ही प्रोग्राम को प्रोसेस कर सकता है, क्योंकि इसमें एक समय में एक ही यूजर कम्प्यूटर पर कार्य कर सकता है। यह सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है।



मल्टी - टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi- Tasking Operating System)
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में एक से अधिक कार्यों को सम्पन्न करने की क्षमता होती है। इसमें उपयोगकर्ता सरलता से दो कार्यों के मध्य स्विच (Switch) कर सकता है। मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम को दो भागों में विभाजित किया गया है।


1. प्रिंप्टिव ऑपरेटिंग सिस्टम (Preemptive Operating System)


इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम को कई कंप्यूटर प्रोग्राम्स तथा हार्डवेयर डिवाइसेज शेयर करते हैं तथा उनका प्रयोग करते हैं। यह अपने समस्त कंप्यूटेशन टाइम (Compution Time) को कार्यों के मध्य बांट देता है और एक पुरनिर्धरीत मापदंड (Predefind Criteria) के आधार पर ही किसी नए कार्य का निष्पादन रोककर करता है।



को - ऑपरेटिव मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Co - operative Multi - Tasking Operating System)


यह मल्टीटास्किंग का एक सरलतम रूप होता है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम में एक प्रोग्राम तब तक सीपीयू का प्रयोग करता है, जब तक उसे आवश्यकता होती है। यदि कोई प्रोग्राम सीपीयू का प्रयोग नहीं कर रहा है, तो वह दूसरे प्रोग्राम को अस्थाई रूप से सीपीयू को प्रयोग करने की अनुमति दे देता है।


मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi User Operating System)


इस ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में बहुत से यूजर कम्प्यूटर पर कार्य कर सकते हैं। सामान्यतः प्रत्येक यूज़र एक टर्मिनल के द्वारा मुख्य कम्प्यूटर से जुड़ा रहता है। टर्मिनल में कीबोर्ड एवं मॉनिटर होते है, जिनका माध्यम से यूजर इनपुट करने के कार्य करता है, लेकिन प्रोसेसिंग का कार्य कम्प्यूटर पर ही होता है। प्रोसेसिंग का परिणाम यूज़र के टर्मिनल की स्क्रीन पर देखा देता है।

बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Processing Operating System)
इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक प्रकार के सभी कार्यों को के बैच के रूप में संगठित करके एक साथ क्रियान्वित किया जाता है। इस कार्य के लिए बैच मॉनिटर सॉफ्टवेयर (Bach Monitor Software) का प्रयोग किया जाता है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है, जिनमे उपयोगकर्ता के हस्तक्षेप (Interfere) की आवश्यकता नहीं होती है।


बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी प्रोग्राम के क्रियान्वयन के लिए कम्प्यूटर के सभी संसाधन उपलब्ध रहते है इसलिए टाइम मैनेजमेंट की आवश्यकता नहीं होती। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग संख्यात्मक विश्लेषण (Numerical Analysis), बिल प्रिंटिंग आदि में किया जाता है।

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम ( Real Time Operating System)
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में निर्धारित समय - सीमा में परिणाम देने को महत्व दिया जाता है। ऐसा न होने पर सिस्टम की परफॉर्मेंस घट जाती है। इसमें एक प्रोग्राम के आउटपुट की दूसरे प्रोग्राम में इनपुट डेटा के रूप में प्रयोग किया जाता है। पहले प्रोग्राम के क्रियान्वयन और परिणाम रुक जाता है। अतः इस व्यवस्था में प्रोग्राम के क्रियानवयन समय (Execution Time) को तीव्र रखा जाता है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग उपग्रहों की संचालन हवाई जहाज के नियंत्रण, परमाणु भट्ठियों, रेलवे आरक्षण आदि में किया जाता है। यह दो प्रकार का होता है


हार्ड रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Hard RTOS)
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रोग्राम का निष्पादन निर्धारित समय पर ही पूरा होता है।


सॉफ्ट रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Soft RTOS)
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रयोग का निष्पादन निर्धारित समय से पहले भी पूरा हो सकता है।



टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time Sharing Operating System)


इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में, एकसाथ एक से अधिक यूजर्स या प्रोग्राम्स, कम्प्यूटर के संसाधनों का प्रयोग कर सकते हैं। टाइम शेयरिंग कम्प्यूटर को अपने संसाधनों के प्रयोग हेतु प्रत्येक उपयोगकर्ता या प्रोग्राम को समय का एक छोटा भाग आवंटित करता है, जिसे टाइम स्लाइस (Time Slice) या क्वांटम (Quantam) कहते है।


इस टाइम स्लाइस में यदि कोई उपयोगकर्ता या प्रोग्राम किसी संसाधन का प्रयोग करता है तो दूसरा उपयोगकर्ता या प्रोग्राम उस संसाधन के प्रयोग हेतु प्रतीक्षा करता है, लेकिन यह समय इतना छोटा होता है कि अगले उपयोगकर्ता या प्रोग्राम को यह महसूस भी नहीं होता है कि उसने प्रतीक्षा है, उपयोगकर्ता यह समझता है कि वहीं एकमात्र उपयोगकर्ता है जो कम्प्यूटर का प्रयोग कर रहा है। उदाहरण, मेनफ्रेम कम्प्यूटर, जिसमें एक समय में एक कम्प्यूटर पर एक से अधिक उपयोगकर्ता कार्य करते हैं, लेकिन फिर भी प्रत्येक व्यक्ति यही समझता है कि वहीं एक मात्र उपयोगकर्ता है।


इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में टाइम मैनेजमेंट की आवश्यकता होती हैं, क्योंकि कई प्रोग्राम मुख्य मैमोरी का सही मैनेजमेंट आवश्यक होती है, क्योंकि कई प्रोग्राम मुख्य मैमोरी में एक साथ उपस्थित होते हैं। इस व्यवस्था मै सभी प्रोग्राम्स टाइम स्लाइस के आधार पर मुख्य मैमोरी में बारी बारी से जाते हैं तथा टाइम स्लाइस पूर्ण होने पर प्रोग्राम को सेकंडरी मैमोरी में भेज दिया जाता है।


इस प्रक्रिया को स्वेपिंग (Swapping) कहते है, यदि किसी प्रोग्राम के संपन्न होने में टाइम स्लाइस से अधिक समय लगता है, तो उस प्रोग्राम को रोककर अन्य प्रोग्राम्स को क्रियान्वित (Execute) किया जाता है।


नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Network Operating System)
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में सभी कम्प्यूटर्स एक नेटवर्क से जुड़े होते हैं। नेटवर्क से जुड़े हुए सभी कम्प्यूटर एक दूसरे के साधनों को शेयर कर सकते हैं, जिसे रिसोर्स शारिंग (Resours Sharing) कहा जाता है। शेयरिंग के द्वारा इन कम्प्यूटरों के मध्य फाइलों एवं सवांदो का आदान प्रदान भी हो सकता है।


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