सॉफ्टवेयर क्या है? जाने पूरी जानकारी।

 Software क्या है software कितने प्रकार का होता है, सॉफ्टवेयर का हिंदी अर्थ क्या होता सॉफ्टवेर का क्या उपयोग किया जाता है, और सॉफ्टवेर की परिभाषा काफी सारे लोगो को मालूम नहीं होता है इस पोस्ट में आप इन सभी चीजों को जानने वाले है।


कम्प्यूटर मूलतः एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो स्वयं कार्य नहीं कर सकती इसलिए इसे कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है। इसके लिए इस उचित आदेश दिए जाते हैं। यदि ये आदेश न दिए जाएं, तो कम्प्यूटर की कोई उपयोगिता नहीं होती, चाहे वह कितनी ही उच्च कोटि का क्यों न ही हो।

सॉफ्टवेयर क्या है

यह उसी तरह है, जैसे कोई अच्छा बजने वाला हारमोनियम या पियानो तब तक बेकार ही रहता है जब तक हमारा दिमाग, हमारी उंगलियों को उसे बजाने का आदेश न दे। इसी प्रकार सॉफ्टवेयर है, जो कम्प्यूटर में जान डालकर उससे सभी कार्य करा लेता है। सॉफ्टवेयर के बिना कम्प्यूटर बिना आत्मा के शरीर या बिना बिजली के टेलीविज़न जैसा ही है।
आइए सबसे पहले सॉफ्टवेयर क्या है और इसका क्या परिभाषा होता है ये जानते है।

What is Software (सॉफ्टवेयर क्या है?)

सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए कम्प्यूटर प्रोग्रामों और संबंधित डेटा का एक संग्रह है, जो कम्प्यूटर को यह बताने के लिए निर्देश प्रदान करता है कि क्या और कैसे करना है। सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर के विभिन्न हार्डवेयर के बीच समन्वय स्थापित करता है, ताकि किसी विशेष कार्य को पूरा किया जा सके। इसका प्राथमिक उद्देश्य डेटा को सूचना में परिवर्तित करना है। सॉफ्टवेयर के निर्देश के अनुसार ही हार्डवेयर कार्य करता है। इसे प्रोग्रामों का समूह भी कहते हैं।
अब चलिए ये जानते हैं कि सॉफ्टवेयर के वो प्रकार क्या क्या है


Types of Software (सॉफ्टवेयर के प्रकार)

सॉफ्टवेयर को उसके कार्यों तथा सरंचना के आधार पर जितने भागों में विभाजित किया गया है आइए एक एक करके उनके बारे में जानते है

1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)

जो प्रोग्राम कम्प्यूटर को चलाने, उसको नियंत्रित करने, उसके विभिन्न भागों की देखभाल करने तथा उसकी सभी क्षमताओं का अच्छे से अच्छा उपयोग करने के लिए लिखे जाते है, उनको सम्मलित रूप से सिस्टम सॉफ्टवेयर कहा जाता है। 


सामान्यतया सिस्टम सॉफ्टवेयर के डेवलपर (Developer) द्वारा उपलब्ध कराए जाते है। वैसे ये बाजार से भी खरीदे जा सकते हैं। कम्प्यूटर से हमारा संपर्क या सवांद सिस्टम सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर के माध्यम से ही हो पता है। वास्तव में सिस्टम सॉफ्टवेर के बिना कम्प्यूटर से सीधा संपर्क संभव नहीं है, इसलिए सिस्टम सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता की सुविधा के लिए ही बनाया जाता है।


सिस्टम सॉफ्टवेयर से हमें बहुत सुविधा हो जाती है है, क्योंकि यह कम्प्यूटर को अपने नियंत्रण में लेकर हमारे द्वारा बताए गए कार्यों को करने तथा प्रोग्रामों का सही - सही पालन करने का दायित्व अपने ऊपर ले लेता है। 

कार्यों के आधार पर सिस्टम सॉफ्टवेयर निम्न प्रकार के होते हैं। 


  1. ऑपरेटिंग सिस्टम
  2. भाषा अनुवादक
  3. डिवाइस ड्राइवर
  4. एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर
  5. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर

1. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating system)

यह कुछ विशेष प्रोग्रामों का एक ऐसा व्यवस्थित समूह है, जो किसी कम्प्यूटर के सम्पूर्ण क्रियाकलाप को नियंत्रित करता है। यह कम्प्यूटर के साधनों के उपयोग पर नजर रखने और उन्हें व्यवस्थित करने में यूजर की सहायता करता है। ऑ

सिस्टम विशेष सेवाएं देने वाले प्रोग्रामो का मशीनी भाषा में अनुवाद करता है और उपयोगकर्ता के इच्छा के अनुसार आउटपुट प्राप्त करने के लिए डेटा का प्रबंध करता है।


वास्तव में, यह उपयोगकर्ता और कम्प्यूटर के हार्डवेयर के बीच इंटरफेस का कार्य करता है। एम एस डॉस, विंडोज़ एक्सपी/2000/98, Unix, लाइनक्स इत्यादि ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ उदाहरण हैं।

2. भाषा अनुवादक (Language Translator)

ये ऐसा प्रोग्राम हैं, जो विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखे गए प्रोग्राम का अनुवाद कम्प्यूटर की मशीनी भाषा (Machine Language) में करते हैं। प्रोग्रामों का अनुवाद करना इसलिए आवश्यक होता है, क्योंकि कम्प्यूटर मशीनी अपनी भाषा में लिखे हुवे प्रोग्राम का पालन कर सकता है।


भाषा अनुवादको को तीन भागों में बांट जाता है

(a) असंबेलर (Assembler)

यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो असेम्बली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को पढ़ता है और उसका अनुवाद मशीन भाषा में कर देता है। असेम्बली भाषा में लिखे प्रोग्राम को सोर्स प्रोग्राम कहा जाता है और मशीनी भाषा में अनुवाद करने के बाद जो प्रोग्राम प्राप्त होता है, उसे ऑब्जेक्ट प्रोग्राम कहा जाता है।

(b) Compiler 

यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High Level Programing Language) में लिखे गए सोर्स प्रोग्राम का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है। Compiler सोर्स प्रोग्राम के प्रत्येक कथन या निर्देश का अनुवाद करके उसे मशीनी भाषा के निर्देश में बदल देता है। प्रत्येक उच्चस्तरीय भाषा के लिए एक अलग compiler की आवश्यकता होती है।

(c) Interpreter


यह भी किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए सोर्स प्रोग्राम का अनुवाद मशीन भाषा में करता है, परंतु यह एक बार में सोर्स प्रोग्राम के केवल एक कथन को मशीनी भाषा में अनुवादित करता है और उसका पालन करता है।


इसका पालन हो जाने के बाद ही वह सोर्स प्रोग्राम के अगले कथन का पालन हो जाने के बाद ही वह सोर्स प्रोग्राम के अगले कथन का मशीनी भाषा में अनुवाद करता है। मूलतः compiler और interpreter का कार्य समान होता है, अंतर केवल यह है कि compiler जहां ऑब्जेक्ट प्रोग्राम बनाता है, वहीं इंटरप्रेटर कुछ नहीं बनता इसलिए इंटरप्रेटर का उपयोग करते समय हर बार सोर्स प्रोग्राम की आवश्यकता पड़ती है।

3. डिवाइस ड्राइवर (Device Driver)

यह एक विशेष प्रकार का सॉफ्टवेयर होता है, जो किसी युक्ति (Device) के ऑपरेशन को समझता है। ये सॉफ्टवेयर किसी युक्ति तथा उपयोगकर्ता के मध्य इंटरफेस का कार्य करता है। किसी भी device को सुचारू रूप से चलाने के लिए चाहे वह प्रिंटर, माउस मॉनिटर या कीबोर्ड ही हो, उसके साथ एक ड्राइवर प्रोग्राम जुड़ा होता है।

यह ऑपरेटिंग सिस्टम के निर्देशो को कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के लिए उनकी भाषा में परिवर्तित करता है। डिवाइस ड्राइवर निर्देशो का ऐसा समूह होता है जो हमारे कम्प्यूटर का परिचय उससे जुड़ने वाले हार्डवेयर से करवाता है।


2. एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)

यह उन प्रोग्रामो का समूह है, जो हमारा वास्तविक कार्य कराने के लिए लिखे जाते हैं; जैसे - कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन की गणना करना, सभी लेन देन व खातों का हिसाब किताब रखना, विभिन्न प्रकार की रिपोर्ट छपना, स्टोक की स्तिथि का विवरण देना, पत्र डॉक्यूमेंट तैयार करना आदि। कम्प्यूटर वास्तव में इन कार्यों के लिए ही प्रयोग में लाए जाते हैं।

ये काम प्रत्येक कंपनी या उपयोगकर्ता के लिए अलग अलग प्रकार के होते हैं, इसलिए हमारी आवश्यकता के अनुसार इनके लिए प्रोग्राम हमारे द्वारा नियुक्त प्रोग्रामर द्वारा लिखे जाते हैं। हालांकि ऐसे प्रोग्राम सामान्य तौर पर एक जैसे लिखे हुवे भी आते हैं, उन्हें रेडीमेड सॉफ्टवेयर (Readymade) या पैकेज (Package) कहा जाता है; जैसे - एम एस वर्ड (MS-Word), एम एस एक्सेल (MS- Excel), टैली (Tally), कोरल ड्रा (Coral Drawe), पेज मेकर (Page Maker), फोटोशॉप (Photoshop) आदि।


इन एप्लिकेशन प्रोग्रामर (Application Programmer) कहा जाता हैं। इन एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर का प्रयोग करने वाले यूजर एप्लिकेशन उपयोगकर्ता कहलाते है।
सामान्यतः एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं

  1. सामान्य उद्देश्य एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर
  2. विशिष्ट उद्देश्य एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर

1. सामान्य उद्देश्य एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर

प्रोग्रामो का वह समूह , जिसे यूजर अपनी आवश्यकतानुसार अपने सामान्य उद्देश्यों कि पूर्ति के लिए उपयोग करते हैं, सामान्य उद्देश्य सॉफ्टवेयर कहलाते है; जैसे - ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर  जिसका प्रयोग द्वारा यूजर निर्मित डेटा का चित्रपुर्ण ग्राफिक्स का प्रस्तुतीकरण करता है।

ये सॉफ्टवेयर विशेष कार्यों से संबंधित होते है, परन्तु इनका उद्देश्य केवल सामान्य कार्य करने के लिए होता है, जिस कारण ये सॉफ्टवेयर लगभग प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक संस्था तथा प्रत्येक कार्यालय में दैनिक रूप से उपयोग में लाए जाते हैं।


कुछ सामान्य उद्देश्य एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर

(a) वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर (Word Processing Software)
(b) इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट (Electronic Spreadsheets)
(c) प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर (Presentation Software)
(d) डेटा बेस मैनेजमेंट सिस्टम (DBMS)
(e) डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing - DTP Software)
(f) ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software)
(g) मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर (Multimedia Software)

2. विशिष्ट उद्देश्य एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर

प्रोग्रामो का वह समूह, जो एक विशेष प्रकार के कार्य को एक्जिक्यूट करने के लिए प्रयोग किया जाता है, विशिष्ट उद्देश्य सॉफ्टवेयर कहलाते है; जैसे - होटल प्रबंधन संबंधी सॉफ्टवेयर, जिसका प्रयोग होटलों में ग्राहकों की सूचना, बुकिंग विवरण, बिलिंग विवरण आदि को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

 विशिष्ट उद्देश्य सॉफ्टवेयर का विभिन्न क्षेत्रों में निम्न है

(a) इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम एंड परचेसिंग सिस्टम (Inventory Management System and Purchasing System)
(b) पेरोल मैनेजमेंट सिस्टम (Payroll Management System)
(c) होटल मैनेजमेंट सिस्टम (Hotel Management System)
(d) रिजर्वेशन सिस्टम (Reservation System)
(e) रियोर्ट कार्ड जेनरेटर (Report Card Generator)
(f) अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software)
(g) बिलिंग सिस्टम (Billing System)

3. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)

ये प्रोग्राम कम्प्यूटर के रख रखाव से संबंधित कार्य करते हैं। ये प्रोग्राम्स कम्प्यूटर के कार्यों को सरल बनाने, उसे अशुद्धियों से दूर रखने तथा सिस्टम के विभिन्न सुरक्षा कार्यों के लिए बनाए जाते हैं। ये पैकेज होते है जो सॉफ्टवेयर में इंस्टॉल करते समय कम्प्यूटर में लोड हो जाते हैं।


यह कुछ ऐसे प्रोग्राम का समूह होता है, जो सिस्टम सॉफ्टवेयर नहीं होते, परंतु जिनकी आवश्यकता हमें बार बार पड़ती है। यूटिलिटी सॉफ्टवेयर, कई ऐसे कार्य करता है जो कम्प्यूटर का उपयोग करते समय हमें करने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए; यूटिलिटी प्रोग्राम हमारी फाइलों का बैकअप किसी बाहरी स्टोरेज डिवाइस पर के जाने का कार्य कर सकता है। ये सिस्टम सॉफ्टवेयर के अनिवार्य भाग नहीं होते  परंतु सामान्यतया उसके साथ ही प्रयोग किए जाते है और कम्प्यूटर डेवलपर द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं।


यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्न प्रकार है

(a) टेक्स्ट एडिटर (Text Editor)
(b) डिस्क फ्रेगमेंटर (Disk Fragmenter)
(c) बैकअप यूटिलिटीज (Backup Utilities)
(d) डिस्क क्लीनर्स (Disk Cleaners)
(e) एंटीवायरस (Antivirus)
(f) डिस्क कंप्रेशन (Disk Compression)
(g) फाइल सॉर्टिंग प्रोग्राम (File Sorting Program)
(h) डेटा सिलेक्शन प्रोग्राम (Deta selection Program)



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