आखिर गूगल सर्च इतनी जल्दी कैसे काम करता है? : Google

आप जब भी वेब पर कुछ चीज सर्च करते हैं तो आपको उस चीज के हजारो लाखो रिजल्ट्स मिल जाते हैं. पर उनमे से सबसे उपयोगी चीज जो आपके लिए जरुरी है उसको खोज पाना थोड़ा मुश्किल होता है. 

और इसी काम के लिए गूगल हमारा मदद करता है. वो हमको बस वही चीजें लाके देता है जो हमारे लिए जरुरी है. 


आज के डेट में गूगल के बारे में कौन नहीं जनता है. हर कोई इसके बारे में जानता है की ये के सर्च इंजन है जिसमे आप कुछ भी चीज सर्च करते है तो आपको उसके लाखो रिजल्ट्स चन्द सेकंड में मिल जाते हैं. 

पर क्या आपको ये पता है की गूगल आखिर इतने सारे रिजल्ट्स में से ये कैसे डिफाइन करता है की आपके लिए उपयोगी जानकारी कौन सी है और कुछ ही सेकंड में आपके पास लाके कैसे रख देता है? 

अगर आपको इसका आंसर नहीं पता है तो कोई बात नहीं हम आपको आज के इस पोस्ट में यही चीज बताने वाले हैं. 


हम आपको बताएँगे की गूगल जानकारी कहा से कैसे लाता है? और आपको आपके ही काम की जानकारी कैसे दिखाता है? 

1. गूगल जानकारी कहाँ से लाता है? 

2. उनको कैसे डिफाइन ( छांटता ) करता है? 

3. गूगल का सर्च अल्गोरिथम क्या है? 





सबसे पहले हमलोग जानते हैं कि गूगल इतनी जानकारी लाता कहा से हैं? 

1. गूगल जानकारी कहाँ से लाता है? 


दरअसल गूगल खुद से ही जानकारी इक्क्ठा नहीं करता है बल्कि वो दूसरे के द्वारा बनाये गए जानकारी को अच्छे से चेक करके आपको दिखाता है. 

वो अलग अलग वेबसाइट से जानकारी को चेक करता है कि ये कितना काम का है उसके हिसाब से आपको दिखाता है.  

उसके लिए गूगल अपना सर्च अल्गोरिथम अप्लाई करता है जो ये डिफाइन करता है कि किस वेबसाइट के पेज को कहाँ दिखाना है. 




2. अब जानते हैं कि गूगल डिफाइन कैसे करता है? 



गूगल इसके लिए मुख्य रूप से तीन स्टेप को फॉलो करता है: 

(i) Crawl 

(ii) Index

(iii) Ranking


चलिए इन सब को एक एक करके समझते हैं कि ये क्या होते हैं? 

(i) Crawl: 

गूगल का सबसे पहला काम होता है वेबसाइट्स को क्रॉल करना.  इसके लिए गूगल वेबसाइट के मालिक को एक टूल प्रोवाइड करता है जिसमे वो अपने वेबसाइट को सबमिट करते है. वेबसाइट के मालिक उस टूल में Sitemap सबमिट करता है उसके बाद ही गूगल के स्पाइडर्स यानि कि बोट्स उस वेबसाइट में जाकर सब कुछ चेक करते हैं. 

बोट्स उस वेबसाइट में जितने भी लिंक होते हैं उनके माध्यम से अलग-अलग वेब पेज में जाता है और उनको चेक करता है.  


गूगल का जो सॉफ्टवेयर होता है जो इन चीजों को चेक करता है वो ये भी चेक करता है कि इस पेज में क्या क्या बदलाव हुए हैं इसमें कितने बेकार लिंक पड़े है जो काम का नहीं है.


गूगल के कंप्यूटर प्रोग्राम ही ये तय करते है कि किस वेबसाइट यानि कि वेब पेज को क्रॉल करना है कितना बार क्रॉल करना है , और हर साइट से कितने पेज को इक्क्ठा करना है. 

गूगल वेबसाइट के मालिकों को सर्च कंसोल कि सुविधा देता है जिससे वेबसाइट के मालिक को ये पता चल सके कि उनकी साइट को कैसे क्रॉल किया जाता है उसमे कितनी प्रॉब्लम (Error) आ रही है.

गूगल कभी भी किसी के साइट को ज्यादा क्रॉल करने के पैसे नहीं लेता है वो ये सब कुछ फ्री में करता है. गूगल सभी को एक तरह के ही टूल प्रोवाइड करता है ताकि उसके यूजर को बेहतर नतीजे मिल सके. 


वेब लगातार बढ़ रहे किताबों कि एक ऐसी लाइब्रेरी है जिसमे आपको हर तरह कि जानकारी मिल जाएगी. और इन सारी जानकारी को सेव करके रखने के लिए कोई फाइलिंग सिस्टम नहीं है. 



गूगल वेब क्रॉलर नाम के सॉफ्टवेयर का यूज़ करके सार्वजनिक रूप से इंटरनेट में मौजूद वेब पेजेस को खोजता है. क्रॉलर वेब पेज को देखते हैं और उन पर पड़े लिंक के जरिये और ज्यादा जानकारी इक्क्ठा करते है. 


(ii) Index:

जब क्रॉलर वेब पेजेस को क्रॉल कर लेते हैं तो उनका दुसरा काम होता है कि प्राप्त किये जानकारी को इंडेक्स करना यानि कि एक जगह जमाना. इंडेक्स एक लाइब्रेरी कि तरह होता है जिसमे आपको हर तरह कि जानकारी मिल जाती है. 

ये लाइब्रेरी ऐसा होता है कि दुनिया के सारे लाइब्रेरी को मिलाकर बनाया गया हो. 

अब प्राप्त जानकारी के क्वालिटी के हिसाब से जमाया जाता है जिसमे ये चेक किया जाता है कि इसका यूआरएल, टाइटल, डिस्क्रिप्शन, हैडिंग कैसा है. इसी से यह पता चलता है कि ये पेज किस बारे में है.

ताकि जब कोई गूगल पर वो प्रश्न करे तब उसे दिखाया जा सके. 


गूगल उस पेज को इंडेक्स करते समय हर चीज पर खास ध्यान रखता है कि इस पर जो जानकारी है वो ताजा है नहीं उसमे किस तरह के कीवर्ड यूज़ किये गए हैं आदि. 


गूगल सर्च इंडेक्स में अरबो वेब पेज है और इनका साइज 100 मिलियन Gigabite से भी ज्यादा है. 



(iii) Ranking:


अब जो इसका लास्ट स्टेप है वो है रैंकिंग यानि कि जब कोई उस जानकारी से रिलेटेड कुछ सर्च करे तो उसको किस नंबर पे दिखाना है. 

गूगल जो अपने पास पेज इंडेक्स किये रहता है उनमे से ही यूजर को रिजल्ट दिखाता है. 

गूगल इसके लिए उस पेज में क्वालिटी चेक करता है कि ये यूजर को कितना और कैसा जानकारी दे पायेगा.  अगर किसी वेब में अच्छी जानकारी होती है और काम लायक तो उसको सबसे ऊपर दिखाया जाता है. 

और अगर कुछ टाइम बाद उस बेहतर पेज से भी अच्छी पेज मिल जाती है तो उस पहले दिखाए गए पेज को नीचे कर दिया जाता है और जो नया पेज होता है जिसमे  अच्छी जानकारी होती है उसको फिर ऊपर कर दिया जाता है. 


हमें आशा है कि आपको हमारे इस आर्टिकल से जरूर कुछ जानने को मिला होगा. 







 

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