FIR का फुल फॉर्म | FIR क्या होता है? FIR के बारे में और जानकारी

 FIR का नाम अपने टीवी, पर या तो और भी कहीं पुलिस स्टेशन पर अपने जरूर सुना होगा। क्या आपको पता है कि FIR का full form क्या होता है। FIR क्या है, 

FIR क्यूं किया जाता है, FIR का मतलब क्या होता है। FIR कोन लिखता है। FIR क्यों लिखा जाता है? ज़ीरो फिर क्या है? FIR के बाद क्या  प्रोसीजर होता है? इस प्रकार के सवाल के जवाब यदि आप खोज कर रहे है तो ध्यान से पढ़ते रहिए। आपको इस पोस्ट में सभी जवाब मिलने वाली हैं। 


FIR का full form

FIR - First Information Report


1. FIR क्या है?

किसी जुर्म की या किसी घटना कि सूचना पुलिस को लिखित रूप में देना ही एफआईआर या प्रथम सूचना रिपोर्ट है।


2. What is the Procedure after FIR?

पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने के बाद आगे का प्रोसीजर पुलिस का होता है। पुलिस उस case से रिलेटेड सारे रिकॉर्ड फाइल तैयार करता है। 

और छान बिन स्टार्ट करता है, जिसके दौरान गवाह की स्टेटमेंट लेता है और सारे सबूत खोजता है। पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करता है।

यदि तहकीकात के दौरान यदि पुलिस को कोई सबूत न मिले जो कि जुर्म साबित कर पाए बिना किसी गवाह के तो झूठा case बंद कर दिया जाता है।



3. How Do you write FIR?

* FIR में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जैसे घटना स्थल, समय, आरोपी, शिकायती आदि का नाम होना चाहिए।

* फर्स्ट इवेस्टिगेशन रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण चीज की यह हिन्दी में लिखना चाहिए।

* जहां अपराध हुआ है उसकी दूरी कितनी है।

* नाम / पिता या पति का नाम 

* अपराध की प्रकृति कैसी है मतलब किस प्रकार का अपराध हुआ है (चोरी हत्या बलात्कार आदि)


4. यदि आपके खिलाफ कोई FIR दर्ज करता है तब क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो पुलिस सबसे पहले उस अपराधी को गिरफ्तार करता है। इसके साथ ही वह इस case की अच्छे से छान बिन करता है। 

यदि अपराधी साबित नहीं होता है तो कार्यवाही रुक जाती है। मामले को 24 ऑवर्स के अंदर अदालत में पेश करना होता है। 


5. क्या हम टेलीफोन से FIR दर्ज करवा सकते है?

काफी सारे लोग इस बारे में सोचते होंगे यदि मामला एकदम गंभीर है तो शायद हो सकता है यदि मामला ज्यादा गंभीर नहीं है तो टेलीफोन से दी गई सूचना को एक रिक्वेस्ट के रूप में माना जाता है।


FIR के बारे में कुछ और समान्य जानकारी:


जो व्यक्ति पीड़ित है या उस घटना का गवाह जिसे घटना के बारे में सही जानकारी हो वो किसी भी पुलिस स्टेशन में First इंफॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज करवा सकता है।

अपराधिक प्रक्रिया संहिता , 1973 की धारा के तहत यदि कोई व्यक्ति घटना के बारे में पूरी जानकारी मौखिक रूप से डेटा है, तो FIR दर्ज करना पुलिस का फर्ज है। जिसमें उस व्यक्ति का हस्ताक्षर और उसके पिता का नाम भी लिखा होना चाहिए।

यदि जुर्म संज्ञेय है, तो देश की किसी भी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर सकते है।

जब कोई व्यक्ति FIR दर्ज करता है तो पुलिस उसे फ्री में उसकी एक प्रति देता है। या वो मांग भी सकता है।


* एक एफआईआर में निम्न जानकारी जरूरी होती है:

(a) घटना कहा हुआ है

(b) घटना का समय और स्थान

(c) घटना का डिटेल


यदि कोई घटना में ऐसी स्थिति आ गई हो जिसमें कोई पुलिस स्टेशन में जा के शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहा है तो उस स्थिति इसे प्राथमिकी दर्ज में फोन ईमेल के माध्यम से भी किया जा सकता है।

कभी कभी FIR दर्ज करने के बाद भी पुलिस उस case को जांच नहीं करती इसका कारण यह है कि उन्हें कोई सबूत नहीं मिल पाता है।


6. FIR किन-किन मामलों में दर्ज किया जाता है?

किन किन मामलों में एफआईआर दर्ज किया जाता है यह इस पर डिपेंड होता है कि अपराध संज्ञेय है कि असंज्ञेय


* असंज्ञेय अपराध क्या है?

ये ऐसे अपराध होते है जो ज्यादा सीरियस नहीं होते मामूली टाइप के अपराध होते है। इस प्रकार के अपराध में सीधा FIR दर्ज नहीं किया जाता है, 

इस शिकायत को मजिस्ट्रेट के पास रेफर किया जाता है मजिस्ट्रेट इसकी निर्णय लेता है। फिर आगे इस मामले पर कार्रवाई होती है। खासतौर में ऐसे मामलों में बहुत कम दर्ज किया जाता है।


* संज्ञेय अपराध क्या है?

ये ऐसे अपराध होते हैं जो अत्यंत गंभीर होते है ऐसे अपराधों में पुलिस तुरंत ही फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट दर्ज करती है। इस प्रकार के अपराध जैसे गोली चलना, मर्डर होना, रेप होना इस तरह के है।

अभी हमने संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध के बारे में जाने अब चलिए ये जानते हैं कि ज़ीरो एफआईआर क्या होता है


* जीरो एफआईआर क्या है?


यदि किसी के साथ जब कोई अपराध हो जाता है तो वह सबसे पहले पास के पुलिस स्टेशन में शिकायत करता है। यदि उस थाने का जुरीडिक्सन न हो तो कोई भी थाने में यदि कोई शिकायती पहुंचता है, तो पुलिस फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट दर्ज करता है। और छान बिन करता है इसके बाद वह उस शिकायत को उसके संबंधित थाने में ट्रांसफर कर देता है जिस इलाके में जुर्म हुआ होता है।

यदि कोई भी अपराध यदि वह संज्ञेय अपराध है तो देश के किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज किया जाता है। इसके लिए कोई भी पुलिस स्टेशन आनाकानी नहीं करता है।

ऐसा करने का कारण यह है कि यदि पुलिस FIR दर्ज कर मामले की जांच न करें तो अपराधी सबूतों को मिटा सकता है।

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